Friday, December 2, 2016

सूर्य स्तुति .....उनके २८ नामों के साथ

संसार में जितनी भी प्रकाशवान वस्तु अथवा पदार्थ हैं उसमे प्रकाश सूर्य से ही संभव है l पञ्च महाभूतों में अन्य चार महाभूत सूर्य के आश्रय के बिना संभव नहीं l



हो ‘सूर्य’ तुम ‘अर्यमान’ तुम ‘त्वष्टा’ तुम्ही ‘सविता’ तुम्ही
तुम ही तपे हो स्वर्ण से हो अग्नि की गुरुता तुम्ही
तुम ही जगत की साधना हर निस दिन तुम्हारा गान है
इस विश्व का आलोक तुम रत्नों की तुममे खान है

हो ‘भानु’ तुम ‘कामद’ तुम्ही ‘दिनमणि’ ‘दिवाकर’ हो तुम्ही
‘रविकर-निकर’ उद्भट तुम्ही ‘दिवनाथ’ ‘’ गहवर ' हो तुम्ही
भूलोक का कण-कण सदा ‘दिनमान’ का पूजन करे
गंधर्व ऋषि मुनि यक्ष तक भी तेरा आवाहन करें  

हो पुत्रवत्सल श्रेष्ठ बुद्धि सद्भाव धैर्य की खान हो
दो नैन का उजियार हो ब्रह्माण्ड का अभिमान हो
तेरे चमकते तेज से ही चक्र विष्णु का बना
है सत्य सात्विक तेज तप का आचरण तुझसे जना

‘आदित्य’ तुम ‘कुंतीपती’ अभिमान हो धुलते तुम्ही
‘मार्तण्ड’ ‘रवि’ ‘दिनकर’ तुम्ही आपत्तियाँ हरते तुम्ही
करता सुबह जो प्रार्थना पाता अमित वरदान है
संसार की हर वस्तु ज्योतिर्मय तुम्ही से ज्ञान है

हो ‘अर्क’ तुम ‘विवस्वान’ तुम ‘अधिपति’ ‘प्रभाकर’ हो तुम्ही
हो शीत का उपचार तुम विधु मखमली भी हो तुम्ही
हो ‘अंशुपति’ ‘वह्निनाथ’ तुम ‘धाता’ तुम्ही ‘पूषा’ तुम्ही
‘दिग्नाथ’ ‘पावकनाथ’ हो तुम प्राणदा ऊषा तुम्ही

आता प्रलय जब-जब धरा पर नीर किरणें सोखतीं
रचता नया संसार तब नव नव प्रजाती बोलती
हो ‘भास्कर’ की प्रार्थना तन मन मनस अरु भाव से
तो तेज तुझ सा त्याग तुझ सा मान ध्यान प्रभाव से  



Saturday, November 26, 2016

हम जाने हम कौन

ख़बर आई है कि दाल में नमक कम होने के कारण उसे देंह मुक्त कर दिया गया और उद्धारक को इसमें कोई अफ़सोस नहीं l एक पुराने घर में तमाम मानव बच्चों के कंकाल ढेर लगा और फ्रीज़र में लोथड़े रख लोग मदोन्मत्त हो ज़श्न में डूबे हैं l कहीं कुछ नरों को तेज़ाब से गल-गल के टपकते मांस की महक बहुत सोंधी लग रही है l पूरा एक समूह किसी एक पर हावी हो अपना पुरुषत्व सबित करने को अमादा है l कुछ नरों ने जाल बिछाया है जिसमे एक आतिशबाजी से उछाले गए रंगीन पन्नों की तरह कुछ लोग हवा में लहरा लहरा जमीन पर आ रहे हैं l क्या इंद्रधनुषी छटा है l उन नरों में कुछ पुरुष भी यदा कदा दिख जाते है l पर नरों में बहुत उथल-पुथल है वो अच्चम्भित हैं कि मैंने तो सारे नरों को पुरुषत्व के चोले से अच्छी तरह रंग दिया था और असली पुरुष को उसी असीम सत्ता को अपने पास रखने को तैयार कर लिया था फिर ये कैसे बाहर आ गये ?

कभी-कभी लगता है नर को पुरुष नाम से संबोधित करना भी स्वयं नर की सोची-समझी साजिश है स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने के लिए l जिससे वह देवत्व पद पर बड़ी आसानी से आसीन हो सके l उन्हें परमेश्वर कहा जा सके l जब एक परमेश्वर हो गया तो अन्य पदार्थ, जीव  स्वतः नगण्य, भक्त, साधारण, अति साधारण हो गए l फिर जैसा चाहो वैसा उपयोग करो, उपभोग करो , क्या चिंता ? हर नियम कानून, घर, परिवार, समाज, अधिकार में उसका स्थान ऊपर रहे l वैसे शुरू-शुरू में इतनी भीषण समस्या नहीं रही होगी बस यूँ ही मजाक मजाक में नाम रूपांतरण हो गया होगा l पर दिन बीतते ये साधारण बात न रह गई l इसमें से गरल टपका जो बूँद पर बूँद पड़ने से ऊँचा और ठोस होता गया और उस ठोस पदार्थ का नाम हो गया अहंकार l और नर उसे अपना मान सदैव साथ लिए लिए फिरने लगा l नर खद ही भूल गया कि मेरा नाम रूपांतरित है वास्तव में हम पुरुष नहीं नर हैं l जो पुरातन पुरुष से बिलकुल भिन्न है .....और अहंकार तत्व उसमे सर्वथा वर्जित है इसलिए वो पुरुष है l  

दूसरी ओर ---- परिवर्तन रूप क्रिया होना प्रकृति का स्वाभाव है l हाँ प्रकृति परिवर्तनशील है l वह नश्वर है वह स्वीकारती है l वह जब से अस्तित्व में आई पल-पल, हर क्षण बदल रही है l स्वीकार कर रही है l वो ऋतुओं में ढलती है l ओस की बूँद अभी दिखती है कुछ देर बाद नष्ट हो जाती है l वो कली अभी बंद थी अभी खिला फूल हो गई l हरियाली धरा बंजर हो जाती है l लहलहाती धरती भौगोलिक उथल-पुथल से रेगिस्थान में तब्दील जाती है l गाँव का गाँव जल प्रवाह में विलीन हो जाता है l वो कभी प्रियतम के लिए संजीवनी है तो कभी दावानल l कभी कोमल चन्दन का लेप तो कभी कैकटस l उसमे परिवर्तन होता है वो स्वीकारती है उसे नष्ट होना है वो स्वीकारती है इसलिए उसे अहंकार नहीं l उसने किसी और नाम का चोला नहीं ओढा उसने किसी और पुण्य नाम का लबादा नहीं ओढा l उसे अपनी शाश्वश्ता का अहंकार नहीं l अपने नश्वरता पर खेद भी नहीं l 

किन्तु नर अपनी शाश्वत सत्ता के लोभ में खुद को भूल बैठा है और शाश्वत नाम पुरुष का चोला ओढ़ रखा है l वह सोचना नहीं चाहता की वो, वो नहीं जो खुद को समझ रहा है l वो भी प्रकृति की तरह चित्रकार का मात्र एक संकल्प भर है जो कभी भी ढह सकता है l 

नहीं समझे मैं क्या कह रही हूँ ? ......

आओ मैं बताती हूँ पुरुष क्या है ? .... पुरुष वो चेतन सत्ता है जो सर्वथा अपरिवर्तनशील है......, नित्य है,...... अचल है,...... निर्विकार है......, वो कर्म रहित है......., एक रस है......., क्रिया करने की योग्यता उसी मे होती है  जिसमे परिवर्तन और विकार होता है...... पुरुष में परिवर्तन का स्वाभाव नहीं,..... जो अहंकार से मोहित नहीं होता वही तत्त्ववित् है....... वही तत्वदर्शी है ..... निरंकार है ......ओंकार है और .........वही पुरुष है l

......आदर्शिनी श्रीवास्तव ..... 

Tuesday, October 11, 2016

दशहरा ख़ास

हाँ ये सच है कि आज के समय में रावण का पुतला फूँकना एक नाटक ही है क्योंकि रावण अब गली-गली चौराहे चौराहे घूम रहे हैं l लेकिन कुछ लोग दशहरे में रावण का महिमा मण्डन भी कर रहे हैं और कुछ आगामी दिनों में करेंगे l जैसा प्रति वर्ष होता है  l माना रावण संस्कृत और वेदों का ज्ञाता था शिव जी का परम भक्त था l कामधेनु,अर्क प्रकाश और शिव संहिता जैसी कई पुस्तकों का रचयिता भी था  किन्तु अपनी शक्ति पर घमंड करने वालेऔर चरित्रहीन व्यक्ति का ऐसा अंत होना था जो हुआ l वर्षों तक समाज थू थू कर रहा है l.......... इसीलिए कहा गया है धन आया गया तो कोई बात नहीं लेकिन चरित्र गया तो सब कुछ गया l .........जब पाप का घड़ा भरता है तो उदर का अमृत भी काम नहीं आता l

राज्य विस्तार की हवस में धरती स्वर्ग पाताल एक करने वाले रावण के लिए मार्ग में आने वाली स्त्रियाँउसकी युद्ध की थकन और कामना को शान्त करने का साधन मात्र थीं l राज्य विजय कर लौटने पर मार्ग के अनेकानेक नरेशों, ऋषियों, देवताओं, दानवों की कन्याओं का अपहरण कर लेता और वो विलाप करतीं रह जातीं युद्ध में कोई अपना बेटा खोता कोई पति कोई भाई कोई अपना सखा लेकिन रावण को इससे कोई मतलब न था l वो अपने बहनोई का हत्यारा भी था l जिस गलती को उसने स्वीकार किया था l ...... और तो और अपने बड़े भाई कुबेर के पुत्र नलकूबर की प्रेयसी रम्भा को उसकी इच्छा के विरुद्ध अनुचित संपर्क किया जो नलकूबर से मिलने जा रही थी उसकी ये स्थिति देख नलकूबर ने रावण को शाप दिया l...... रावण के डर से लुकती छिपती पितामह ब्रह्मा के भवन की ओर जाती हुई पुन्जिक्स्थला के  साथ दुराचार किया जिससे ब्रह्मा जी द्वारा रावण शापित हुआ l ........ महापार्श्व द्वारा सीता के साथ जबरदस्ती करने के लिए उकसाने पर रावण ने स्वयं ये स्वीकार किया की वो शाप ग्रस्त है और ऐसा करने पर उसका मस्तक खंड-खंड हो जायेगा l ...... रावण ने ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती को भी तिरस्कृत किया l वेदवती ने रावण द्वारा स्पर्श किये गए बालों तोड़ कर रावण को शाप दिया और स्वयं अग्नि में प्रवेश कर गईं l इसी वेदवती का दूसरे जन्म में माता सीता के रूप में पृथ्वी पर अवतरण हुआ l

यही नहीं रावण डींग मारने वाला औरअसत्यवादी भी था l उसने भरी सभा में कहा की सीता ने एक वर्ष का समय माँगा है और कहा है यदि एक वर्ष तक दशरथ नंदन नहीं आये तो मैं तुम्हे स्वीकार लूँगी l जबकि बाल्मीकि रामायण के सुन्दर कांड के २२वें सर्ग में लिखा है की रावण ने सीता जी को दो माह की अवधि दी थी जिसपर सीता जी ने उसे बहुत फटकारा था और वो दुष्कर राक्षसियों के पास उन्हें छोड़ अपना सा मुँह लेकर चला गया l यहाँ तक कि सीता जी ने लंका का अन्न तक ग्रहण नहीं किया l इंद्र जी के अनुरोध करने पर उनकी दी हुई अमृत खीर ग्रहण की और उतने दिन क्षुधा मुक्त रहीं l

Friday, October 7, 2016

मौसम और प्रकृति ... बियाहू

                                     
पाहुन आज हुआ मौसम 
वसुधा मन को भाई है
धड़कने ताल देती हैं बँसुरिया गुनगुनाई है

विहँस उट्ठी धरा पर 
मखमली पराग का अंचल
भ्रमर के मन में ललकन 
तितलियों के पंख हैं चंचल
प्रकृति की अधमुँदी पलकों में मदिरा छलछलाई है

बंदनवार घन के झूलते 
अम्बर दुअरिया पर
सितारे जड़ रहे कुंदन 
रूपसी की चुनरिया पर
गगन में आतिशें छूटी दिशाएँ झिलमिलाई हैं 

मंत्रित जल फुहारों की 
डोली नभ से आई है
भरी जब माँग जुगनू ने 
पुलक उर ने मचाई है 
मुख को ढाँप करतल से दुल्हनिया मुस्कराई है 

अतिशे =आकाश के प्रकाश तत्व 
भ्रमर = दूल्हा ( मौसम )





Friday, September 30, 2016

तुझपे दिल कुर्बान

अबकी  केरल  भाषण में  मोदी  जी  का  सख्त  लहजा , तेवर  और  गंभीर  मुख मण्डल  ही  बता  रहा  था  कि उनके  मन  ने  जरुर  कुछ  कर  गुजरने  की  ठान ली  है  l 

" हमारे अट्ठारह जवानों की शहादत बेकार नहीं जायेगी "

"पकिस्तान की आवाम देखो ......... देखो पहले कौन अपने देश की गरीबी और बेरोज़गारी ख़त्म करता है l "

सच ही मोदी जी कहा था " भारत प्रगतिशील देश है वो सॉफ्टवेयर निर्यात करता है जबकि पकिस्तान सत्तर साल से वहीँ अटका  है और बस आतंकवाद निर्यात करता है l "

उन्होंने पकिस्तान की आवाम से पकिस्तान के अत्यचारी नेताओं के खिलाफ आवाज़ उठाने का आह्वान किया l ,,,,,,
पकिस्तान बार-बार हमारे अंदरूनी मामलों में टाँग अड़ाता आया है चाहे वो जे एन यू हो या कश्मीर l अब मोदी जी ने पकिस्तान की जनता तक अपनी बात पहुँचाई है l जब पानी सर से ऊपर चला जाए तो ......जैसे को तैसा .......शठ को शठता ही समझ में आती है l  

गुप्त मंत्रणा कर रक्षामंत्री मनोहर परिकर, अजीत डोवाल जी , ले.ज.रणवीर सिंह जी, मोदी जी और सभी सैनिकों को, ४२ आतंकवादियों और दो सैनिकों को मार गिराए जाने के सफल अभियान की बधाई l  

हमारे  जवानो का तीन  किमी तक  रेंगते  हुए जाना अपना पराक्रम दिखाना और जिस उद्देश्य  और  लक्ष्य के साथ वो गए थे उसे पूरा कर सुरक्षित वापस लौट आना l उनके हौसले ,जज्बे , हिम्मत की मिसाल है l २८ सितम्बर के अँधियारे का   फ़ायदा उठाते  हुए लगभग ४० आतंकवादियों और  २ सैनिकों को मार उनके हथियारों को बर्बाद कर चार घंटे में ही आपरेशन पूरा कर अपने स्थान पर वापस आजाना समस्त भारतवासियों के मन में आत्मविश्वास जगा गया l कल बेचारे पकिस्तान का दिन ही खराब था हाकी में भी भारत के हाथों पिटा और सरहद पर भी l भारत ने पूरे ठसके के साथ ये स्वीकार किया कि हाँ मैंने सीमा पार की  और आतंकी ठिकानों को नष्ट किया यही नहीं उसने पहले ही लगभग ३० देशों को ये सूचना दे दी थी और उन्होंने इस बात का कोई विरोध नहीं किया इससे ज़ाहिर होता है की उनका मौन समर्थन मोदी जी के निर्णय के साथ था क्योंकि सभी देश ,पाकिस्तान एक आतंकी अड्डों का देश है इसे स्वीकार करते हैं l क्योंकि वे भी या तो इस आग में जल रहे है या जलता हुआ देख रहे है और देशों को l सार्क सम्मलेन में भारत सहित चार देशों का बहिष्कार भी पकिस्तान को अलग थलग देश घोषित कर रहा है l भारत भी यही चाहता है की युद्ध न हो बस  पकिस्तान की ताकत इतनी क्षीण हो जाए की वो आतंकी गतिविधियों से तौबा कर ले क्योंकि युद्ध का दुष्प्रभाव पीढ़ियों तक  देशों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर अपंग कर देता है l जब जब भारत का कोई नेता पकिस्तान गया या पाकिस्तान से कोई नेता दोस्ती करने के उद्देश्य से भारत आया तब-तब भारत में बम धमाका सुनने को मिला l इससे ये भी ज़ाहिर होता है कि पकिस्तान सरकार का वहाँ की सेना या आतंकियों पर कोई बस नहीं l आतंकी वहाँ छुट्टा घूमा भी करते है और सरकार कुछ नहीं कर पाती जबकि वो भी लाल मस्जिद और पेशावर जैसे दर्द झेल चुकी है l


पकिस्तान भला pok में २८ को हुए हमले से आहत हो भी क्यों ? वो असमर्थ बेबस खुद आतंक पैदा तो करता है दुसरे देशों के लिए ,किन्तु उससे ख़तम करने या सामना करने की ताकत नहीं रखता इसलिए व खुद जर्जर और मजबूर है वो अगर चाहता भी है कि  आतंक ख़त्म हो तो उसके पास इतनी ताकत ही नहीं है की वो उसे ख़त्म कर सके l अमेरिका द्वारा लादेन को मारा जाना और भारत द्वारा इतने आतंकियों का मारा जाना उसके लिए उपहार ही है l जो काम उसे करना चाहिए था उसे दुसरे देश कर रहे हैं l हम अपने घर के कीडेमकोडों के लिए कुछ न करे और बाहर के लोग आकर कीटनाशक से कीड़े नष्ट कर जाए तो हमें क्या दिक्कत  भला ? इसमें दूसरे देश का पैसा दूसरे देश की मेहनत  दूसरे देश की ही सैन्य क्षमता लगती है l तो आतंकवादी भी ये समझ ले की पकिस्तान भी उनका नहीं है जिसके दमपर वो कूदता फिर  रहा है जिसदिन कोई ढंग की सरकार पकिस्तान में आई वो सही साठ ढूँढ उसका खत्म कर देगी l

फिर भी नमुराद पकिस्तान ये मानने को तैयार नहीं की pok में ये हमला हुआ है क्यों माने भला तब तो उसे स्वीकारना होगा की पकिस्तान में आतंकवादी है या फिर ये स्वीकार करे की उसके ४० जवान मारे गए l वो अपने ही झूठ में फँस गया है एक तरफ कहता है हमला हुआ ही नहीं और ये विडियोस और फ़ोटोज़ भारत ने अपने ही देश में बनाई है जब की भारतीय जवानो के हेलमेट में कैमरे फिट थे जिसमे पकिस्तान को पुख्ता सुबूत  दिया जा सके क्योंकि वो बहुत पल्टउऊआ देश है l और दूसरी ओर वो इस घटना की निंदा भी करता है और दो सैनिकों का मरना स्वीकार भी करता है l ये कैसा दोहरापन है उसका l

अब सोचने का विषय ये है कि हमारे १८,१९ सैनिक शहीद हुए थे और हमने ४० आतंकवादी मारे हैं तो क्या इतने बदले से संतुष्ट हो जाना चाहिए ? क्या एक सैनिक की कीमत दो आतंकवादी है ? सैनिकों का परिवार होता है ,भावनाएं होती हैं , देशभक्ति का जज़्बा होने के कारण परोपकार का भाव होता है वो अच्छे घर के अच्छे संस्कारों में पले बढ़े होते हैं उनकी संताने अपने पिता पर गर्व करती हैं उनका नाम छिपाती नहीं  और घर ही क्या पूरा गाँव पूरा शहर पूरा देश उनपर गर्व करता है l एक सैनिक और आतंकवादी की क्या बराबरी ? आतंकवादी की तो लाश भी उसके घर वाले और पाकिस्तानी  सरकार लेने से मना कर देती है l कहीं से भी बच्चे चुराकर बचपन से उनमे घृणा का भाव भर उसे आतंकवादी बनाया जाता है l

सर्जिकल स्ट्राइक की घटना पर हमें मोदी जी के निर्णय और सैनिकों को बधाई देकर खुश होना चाहिए पर अभी और बहुत कुछ करना है  पाकिस्तानी सरकार की नीतियों को बदलने को विवश करना है क्योकि विवश करना ही उसके लिए ठीक शब्द है समझ में तो उसे आता नही l आतंकवादियों  को छेदते हुए उनकी आड़ में काम करने वाली सेना तक पहुँचना है l वहाँ की सेना से बैर इसलिए क्योंकि वो आतंकवादियों की आड़ में अपना काम करती है l वर्ना  किसी देश की सेना से हमारा कोई द्वेष नहीं सब खुश रहे अपनी सीमा में रहे l मैत्री भाव से रहें l  




Tuesday, September 13, 2016

लेख ---चन्दन चर्चित छवि तेरी .....क्या खूब हिंदी हो मेरी


हिंदी भारत की ही नहीं विश्व की सबसे अधिक समृद्ध शास्त्रीय और वैज्ञानिक भाषा है l जो भाषा की ध्वनियों को जैसे का तैसे रूप में प्रस्तुत करती है l देवनागरी लिपि अपेक्षा संसार की अधिकांश लिपियाँ अत्यधिक त्रुटिपूर्ण हैं l इसकी तरह संसार की कोई भी लिपि ध्वन्यात्मक और वैज्ञानिक नहीं है और इसको देश-विदेश के सभी विद्वानों ने एकमत हो मुक्त कंठ से स्वीकार किया है l स्वर और व्यंजन का बहुत स्पष्ट अलग-अलग विभाजन है l स्वरों में भी मूल स्वर पहले और संयुक्त स्वर बाद में बहुत स्पष्टता से आते हैं l इसका उच्चारण स्थान तालू, जिव्हा, कंठ आदि बहुत हिसाब से पूर्ण वैज्ञानिकता के साथ हैं l उच्चारण अंगों को ध्यान में रख कर बहुत साधना के साथ चिंतन मनन और विश्लेषण के इसका निर्माण हुआ है l
आज दुनियाँ के समस्त देशों में भारतीय रह रहे हैं l दुनियाँ के लगभग डेढ़ सौ देशों देशों में ढाई करोड़ भारतीय रह रहे हैं और चालीस देशों के ६०० विश्वविद्यालयों और विद्यालयों में हिंदी पढाई जा रही है l विदेशों में हिंदी में पत्र-पत्रिकाएँ छप रही हैं l अमेरिका की विश्वा और मारीशस की आर्यवीर और जागृति प्रसिद्द पत्रिकाएँ हैं l ये हर्ष का विषय है की भारत ही एक ऐसा देश है जिसकी पाँच भाषाएँ विश्व की सोलह प्रमुख भाषाओँ में शामिल हैं l

संयुक्तराष्ट्र संध में शामिल होने के भारत की केवल खड़ी बोली के हिसाब से सर्वे किया गया जिससे अभी उसका स्थान संयुक्तराष्ट्र संघ के लिए निर्धारी नहीं हो पाया l पर ये क्यों नहीं हो पाया ये विचारणीय प्रश्न है lअगर देवनागरी से उद्धृत बोलियों मराठी, राजस्थानी, नेपाली, पंजाबी जैसी तमाम बोलियों को मिला कर गणना की जाए तो हिंदी भाषा विश्व में प्रथम स्थान पर होगी l इससे संयुक्त राष्ट्र संघ में उसे शामिल हो जाना चाहिए l इसके अतिरिक्त जनसंख्या की दृष्टि से भारत दूसरे नंबर का देश है जिसकी आबादी लगभग १२५ करोड़ है जो दुनियाँ भर के अंग्रेजी भाषी से अधिक हैं l 

भारतीय आर्य भाषाओँ की सभी भाषाओँ का अपने क्षेत्र में विशेष स्थान हैं किन्तु हिंदी भाषा का एक विशिष्ठ और महत्वपूर्ण स्थान है l अवधि ब्रज बुन्देली डोंगरी कन्नड़ आदि अलग-अलग प्रदेशों में अपने स्थान के कारण प्रसिद्द हैं l इन बोलियों में खड़ीं बोली का अलग स्थान इसलिए है क्योंकि ये किसी विशेष स्थान से सम्बंधित नहीं है l शायद ये खरी से इसे खड़ी कहा जाने लगा है l खरी मतलब शुद्ध, प्राकृत, विशुद्ध l भारत में खड़ी बोली का क्षेत्र बहुत विस्तृत है पश्चिम उत्तर और पूरब में इसने अपनी शुद्धता के बल पर अपना स्थान बनाया है l वर्तमान समस्त साहित्य का मूलाधार खड़ी बोली है l अब इस खड़ी बोली में उर्दू फारसी का समवेश होने लगा है l यही खड़ी बोली भारत की राजभाषा, राष्ट्रभाषा और साहित्य  भाषा है l साहित्य में जो स्थान इसका है भारत की अन्य भाषाओँ का नहीं l  
     
इंटरनेट की दुनियाँ में हिंदी को नई उड़ान दी है l जहाँ इंटरनेट पर पहले अंग्रेजी का वर्चस्व था अब हिंदी का भी महत्वपूर्ण स्थान है l हिंदी में मेडिकल और इंजीनियरिग जैसी उच्च शिक्षायें भी हिंदी होने में होने लगीं हैं l सरकार प्रदेशीय हिंदी माध्यम के विद्यालयों में उसकी स्थिति सुधरने में प्रयासरत है l दुनियाँ की अधिक से अधिक भाषाओँ का ज्ञान और यथा समय अनुकरण करना बुद्धिजीवियों का गुण है उन सबके प्रति आदरभाव और ज्ञान के साथ ही हमें हिंदी को समर्पण भाव से अपना कर चलना है l अतः हिंदी की स्थिति किसी प्रकार से शोचनीय नहीं है l 

जहाँ तक वर्तमान साहित्य की बात है लेखन का स्तर गिरता ही जा रहा है हलाकि इंटरनेट पर कुछ विद्वान हिंदी की पुरानी गरिमा बनाये रखने के लिए परिश्रम के साथ प्रयासरत हैं पर उसका फायदा तो वही उठा पायेगा जो सीखना चाहेगा l आजकल लोग त्वरित प्रसिद्धि तो चाहते हैं पर अध्ययनशील नहीं हैं l ये सच है की साहित्य या काव्य ऐसा हो जो जन-ग्राह्य हो शब्दों का चयन बहुत समझदारी से और सुन्दरता से हो किन्तु ऐसा भी न हो कि वो इतना सरल हो जाये की उसका कुछ स्तर ही न रहे l हिंदी संस्कृत की तनया है और हिंदी, साहित्य सृजन में पूर्णतया अपनी माता का तिरस्कार कर दे ये भी उचित नहीं l हमारे लिए कोई चीज़ तभी तक कठिन होती है जब तक वो हमें उसका ज्ञान नहीं होता l हमारी हिंदी के सहस्त्रों शब्दों के महा शब्दकोश में हजारों शब्द काल कोठरी में पड़ी रूपसी की तरह बिना बाहर आये छटपटा छटपटा कर दम न तोड़ दे l लोचन, अक्षि, चक्षु, नैन, दृग जैसे सुन्दर शब्द हमने प्रयोग किये हैं इसीलिए वो सरल लगने लगे हैं l नाव का बोहित शब्द कितना खुबसूरत है पर उसका प्रयोग हम क्यों नहीं करते ? हिंदी के तमाम शब्द बहुत खूबसूरती के साथ शब्दकोश से बाहर लाना भी हमारा कर्तव्य है l एक-एक शब्द के दसियों दसियों पर्यायवाची हैं जिन्हें हम मात्राओं के हिसाब से प्रयोग कर सकते हैं l 
    
 अन्य भाषाओँ के ज्ञान और प्रयोग के साथ हम घर के बच्चों के समक्ष बोलचाल की भाषा हिंदी रखें तो पीढ़ी दर पीढ़ी हिंदी की सौगात हम अगली पीढ़ी को  अनायास ही भेंट करते रहेंगे इससे अन्य लोग भी सुनकर प्रेरित होंगे नई पीढ़ी में अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान बढेगा और हिंदी नित नई उचाईयों को हासिल करती रहेगी l

.....आदर्शिनी श्रीवास्तव ... मेरठ 

Thursday, September 8, 2016

कविता ----उस बिटिया की वो बिटिया दुनियाँ ही थी

उस बिटिया की वो बिटिया दुनियाँ ही थी
जिसके दुःख से
तड़प रहे थे कातर स्वर
स्तब्ध खड़े थे
दिग्दिगंत निशब्द वहाँ
कितना निष्ठुर है
 लीला करने वाला
उस मालिन को कुछ था
अपना होश कहाँ
उस बिटिया की वो बिटिया दुनियाँ ही थी
ज्वर से पीड़ित देंह
अशक्त ढीला-ढीला
मौन भी भय से
मौन खड़ा पीला-पीला
अवचेतन में जो भी शब्द
ठहरते मुख पर
दर्द में डूबे लावों से
गिरते थे सब पर
सब चुप थे पर कहते थे
वो कैसी होगी ?
उस बिटिया की वो बिटिया दुनियाँ ही थी
भीतर गाढ़ा रक्त हुआ
दुःख से तन का
क्रम साँसों का
काया में रह रह अटका
निश्छल बालापन था
नैनों में आता
छुप-छुप कर
खारे घट को था लुढ़कता
आवाक् खड़े थे
सब ढाढस देने वाले
उस बिटिया की वो बिटिया दुनियाँ ही थी

.......आदर्शिनी श्रीवास्तव..........